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कविता संसार

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गोपालदास “नीरज”

अब तुम रूठो

अब तुम रूठो, रूठे सब संसार, मुझे परवाह नहीं है। दीप, स्वयं बन गया शलभ अब जलते-जलते, मंजिल ही बन गया मुसाफिर चलते-चलते, गाते गाते गेय हो गया गायक ही खुद सत्य स्व...
Posted On 03 Apr 2013
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गौरीशंकर आचार्य ‘अरुण’

अँधेरों से कब तक नहाते रहेंगे

अँधेरों से कब तक नहाते रहेंगे । हमें ख़्वाब कब तक ये आते रहेंगे । हमें पूछना सिर्फ़ इतना है कब तक, वो सहरा में दरिया बहाते रहेंगे । ख़ुदा न करे गिर पड़े कोई, कब तक, वे गढ्ढ...
Posted On 03 Jun 2013
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प्रभा दीक्षित

गोपालदास “नीरज”

कविता संसार — हिन्दी – उर्दू कविताओं का एक छोटा सा संग्रह। अब तुम्हारा प्यार भी अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि ! चाहता था जब हृदय ...
Posted On 03 Jun 2013
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गौरीशंकर आचार्य ‘अरुण’

कविता संसार — हिन्दी – उर्दू कविताओं का एक छोटा सा संग्रह। अँधेरों से कब तक नहाते रहेंगे अँधेरों से कब तक नहाते रहेंगे । हमें ख़्वाब कब तक ये आते रहें...
Posted On 03 Jun 2013
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